दिल्ली के काफी व्यस्त, तंग गलियां और मौजूदा वक़्त के हौज़ ख़ास इलाके में स्थित Mayfair Gardens पहली नज़र में एक आम Residential Colony जैसा दिखाई देता है। लेकिन ऊँची इमारतों और शांत गलियों के बीच मध्यकालीन दिल्ली की एक अनमोल विरासत छिपी है—मख़दूम साहब की मस्जिद और मक़बरा। Heritage Records इस परिसर को मुख्यतः पंद्रहवीं–सोलहवीं सदी, यानी लोदी दौर से जोड़ते हैं, हालांकि इसके प्रवेश-द्वार सहित कुछ हिस्से इससे पुराने भी हो सकते हैं।
परिसर में दाख़िल होते ही प्रवेश-द्वार के ऊपर बना खूबसूरत Fluted Dome ध्यान खींचता है। इसके आगे खुला सहन—यानी Courtyard—और पश्चिम में मस्जिद की इबादतगाह इमारत भी मौजूद है। इसकी क़िबला दीवार पर कई मेहराब, सजावटी ताक़ और ढालू Buttresses बने हैं। केंद्रीय मेहराब को ऊँचा रखकर अधिक Prominent बनाया गया है। मस्जिद की सादगी, Rubble Masonry और सीमित सजावट इसे लोदी दौर की बहतरीन स्थापत्य शैली से जोड़ती है।
मस्जिद के सामने और आसपास बने घेरे में अनेक क़ब्रें मौजूद हैं। इनमें एक ऊँचे चबूतरे पर बना गुंबददार Pavilion परंपरागत रूप से मख़दूम साहब का मक़बरा माना जाता है। कभी इसके स्तंभों के बीच लाल बलुआ पत्थर की जालियाँ और गुंबद के भीतर रंगीन Floral Decoration तथा Plaster Inscriptions दिखाई देती थीं। आज इनका केवल कुछ अंश ही बचा है—मानो समय ने इस इमारत की सजावट को खत्म ही कर दिया हो, लेकिन उसकी पहचान आज भी बाकी हो।
उन्नीसवीं सदी की Metcalfe’s Delhi Book में यहाँ दफ़्न व्यक्ति को “मख़दूम सब्ज़वारी” कहा गया है। एतिहासिक श्रोतों के अनुसार वह “किश” प्रदेश के “सब्ज़” नामक स्थान से आए एक प्रतिभाशाली विद्वान थे, जिन्होंने शिराज़ और बुख़ारा में शिक्षा प्राप्त की थी। मगर उनकी सही पहचान और जीवन के बारे में Contemporary Evidence बहुत सीमित है। उनके वंशजों के पाकिस्तान चले जाने की बात मुख्यतः local और Family Tradition पर आधारित है; इसे पूरी तरह Verified Historical Fact नहीं माना जा सकता।

Hauz Khas Portrait Iamage
आज यह Complex दिल्ली की भीड़ के बीच एक अलग ही दुनिया जैसा महसूस होता है। यहाँ न किसी प्रसिद्ध Monument जैसी हलचल है और न पर्यटकों की लंबी कतारें—सिर्फ़ पुराने मेहराब, शांत क़ब्रें, पेड़ों की सरसराहट और कभी-कभी दौड़ती कोई गिलहरी। मख़दूम साहब की मस्जिद हमें याद दिलाती है कि दिल्ली का इतिहास केवल बड़े किलों और मक़बरों में नहीं, बल्कि Residential Colonies के बीच खड़ी ऐसी अनदेखी इमारतों में भी साँस ले रहा है।

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